🧓🏻 लिंगड़ चाचा: माखनपुर के हौसले की मिसाल
"हौसलों की उड़ान के लिए पंख नहीं, बस एक मजबूत इरादा चाहिए।"
🙏 परिचय (Introduction)
नाम: संजीव (प्यार से: लिंगड़ चाचा)
उम्र: 30 से 40 वर्ष के बीच
पेशा: किराना व्यापारी
स्थान: माखनपुर गांव
विशेष पहचान: एक पैर से विकलांग, मगर आत्मबल से भरपूर
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| Z Square मॉल में खरीददारी |
🏠 एक छोटी गुमटी से सफर की शुरुआत
संजीव जी ने अपने संघर्ष की शुरुआत एक छोटी लकड़ी की गुमटी से की थी। गांव के बच्चों के लिए टॉफी, बड़ों के लिए चायपत्ती, मसाले और दालें – धीरे-धीरे उनकी दुकान गांव की जरूरत बन गई।
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| पुरानी दुकान (पेटी, खोखा, गुमटी, लड़की से बनी दुकान) |
💪 विकलांगता नहीं, संकल्प बनी ताकत
एक पैर से विकलांग होने के बावजूद संजीव जी ने कभी हार नहीं मानी। गांव वालों ने उन्हें अपनाया, और बच्चे उन्हें आज भी "लिंगड़ चाचा" कहकर पुकारते हैं – यह नाम अब सम्मान बन चुका है।
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| कानपुर में TVS शोरूम में स्कूटी खरीदते समय |
🏡 पक्का मकान और कानपुर में प्लॉट
आज वही गुमटी एक पक्की दुकान में बदल चुकी है। संजीव जी ने इतनी बचत कर ली कि कानपुर में एक प्लॉट भी खरीद लिया। यह उनके परिश्रम की जीती-जागती पहचान है।
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| पक्के मकान में अब नई दुकान |
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| कानपुर में प्लॉट |
👦 बच्चों के चहेते
दुकान पर बच्चों की भीड़ हमेशा लगी रहती है। कोई चॉकलेट लेने आता है, कोई बिस्कुट, और कई बच्चे तो सिर्फ "लिंगड़ चाचा" से बातें करने आते हैं। उनके चेहरे पर सदा मुस्कान रहती है, जो सबका दिल जीत लेती है।
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| शिवरात्रि पे लिंगड चाचा गन्ने के जूस का दान करते हुए |
🌟 सीखने लायक बातें
✅ विकलांगता कोई कमजोरी नहीं है
✅ मेहनत से बड़ा कोई हथियार नहीं
✅ छोटी शुरुआत से भी बड़ी मंज़िलें हासिल हो सकती हैं
💬 "लिंगड़ चाचा की कहानी हमें सिखाती है कि ज़िंदगी में हारने वाला नहीं, लड़ने वाला बनो।"
✍️ लेखक: Vibhu Vir
🏠 स्थान: माखनपुर गांव







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